2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहते थे

आतंकवादी संगठन सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) पर प्रतिबंध लगने के बाद अस्तित्व में आया संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) भी उसी की राह पर चल पड़ा। जिसके बाद केंद्र सरकार ने इस पर भी 5 साल के लिए बैन लगा दिया है। 19 दिसंबर 2006 को बने PFI ने मध्यप्रदेश में इंदौर और मालवा-निमाड़ क्षेत्र को अपना नेटवर्क फैलाने के लिए सबसे मुफीद माना। 

ये जानकर आपको आश्चर्य होगा कि संगठन में सबसे ज्यादा सदस्यता घर-घर पहुंच रखने वाले लोगों जैसे प्लम्बर, कबाड़ी, इलेक्ट्रीशियन, AC मैकेनिक और ऑटो ड्राइवर जैसे लोगों को दी जा रही थी। ऐसे सभी लोग दलित और पिछड़े समुदाय के अलावा वर्ग विशेष से आते हैं। दूसरा पहलू यह है कि इनकी पहुंच घर-घर तक होती है या बड़े वर्ग को सीधे कनेक्ट कर पाते हैं। इस तरह के पेशे से जुड़े लोग PFI और SDPI में प्रमुख पदों पर भी हैं। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या था कि दो जून की रोटी कमाने के लिए संघर्ष करने वाला भी इस संगठन की कार्यकारिणी में शामिल हो गया और इसके लिए काम करने लगा। कुछ तो वजह होगी।

ये भी पता चला है कि ये लोग मुस्लिम युवाओं-स्टूडेंट्स व मुस्लिम महिलाओं का ब्रेन वॉश करके उन्हें हिंदुओं के खिलाफ भड़काने में लगे हुए थे। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने बीते सप्ताह आधी रात को देशभर में कई जगह छापेमारी की थी। इस दौरान इंदौर से भी PFI के कर्ता-धर्ताओं को पकड़ा था। खुलासा हुआ है कि ये लोग 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए नेटवर्क बनाने में जुटे थे।

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