शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अभिभावकों से कहा कि मरना है तो मर जाइए।

मध्यप्रदेश में स्कूलों की मनमानी कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब इसका विरोध करने पर जिम्मेदार अभिभावकों की समस्या सुलझाने के बजाए उन्हें मरने की सलाह देने लगे हैं। मप्र में पिछले कई सालों से फीस नियामक कानून भले ही ठीक ढंग से लागू नहीं हो पाया है, फिर भी सरकार को अभिभावकों की बजाय स्कूलों की चिंता है। मंगलवार को जब स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से अभिभावकों ने स्कूलों की मनमानी की शिकायत की तो मंत्री बात सुनने को तैयार नहीं हुए तो एक सदस्य ने कहा कि क्या मर जाएं, तो मंत्री ने कार का दरवाजा खोलते हुए कहा कि मरना है तो मर जाइए मंत्री यह बातें कहकर कार में बैठकर चले गए।।

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