रोजी-रोटी के लिए गैराज में काम करते और खाली समय में कविताएं लिखते थे गुलजार

गुलजार की मां बचपन में ही गुजर गई थी। बंटवारे के बाद उनका पूरा परिवार अमृतसर आकर बस गया और गुलजार दिल्ली में पढ़ाई करने के बाद रोजी-रोटी के लिए मुंबई चले आए। शुरू में वह एक गैराज में मैकेनिक का काम करने लगे और खाली समय में कविताएं लिखते थे। गैराज में काम करते-करते गुलजार ने फिल्म इंडस्ट्री में काम तलाशना शुरू किया। साहित्य प्रेमी गुलजार की एक दिन फिल्म निर्देशक बिमल रॉय से मुलाकात हो गई और यहीं से उनके गीतों, संवादों और डायलॉग का सिलसिला भी आगे बढ़ गया। ये मुख्यत: हिन्दुस्तानी भाषा (हिन्दी-उर्दू) और पंजाबी भाषा में लिखते हैं। वैसे कई बोलियों पर भी इनकी अच्छी पकड़ है जिनमें ब्रज भाषा, खड़ी बोली, हरियाणवी और मारवाड़ी में भी लिखते हैं।

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