पारसी इंजीनियर ने बताया था प्रधानमंत्री नेहरू जी को बाढ़ की समस्या का निदान

बाढ़ का तांडव देश के कुछ स्थानों पर जान-माल का बड़ा नुकसान कर रहा है और देश के कई हिस्से जलमग्न हो गए हैं। गौरतलब है कि आजादी के कुछ समय बाद ही इस समस्या को ध्यान में रखते हुए एक पारसी इंजीनियर ने तत्कालीन प्रधानमंत्री के सामने एक योजना प्रस्तुत की थी।

उसका कहना था कि भारत की सभी नदियों को एक-दूसरे से जोड़ देने पर बाढ़ की समस्या का निदान हो सकता है। लेकिन उस पारसी इंजीनियर की इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए सरकार को बहुत बड़ी धन राशि की आवश्यकता थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू जी को यह योजना जानने के बाद लगा कि इसके लिए विदेशों से कर्ज लेना पड़ सकता है और इसे अंजाम देने के बाद इसमें खर्च होने वाली राशि के कारण आर्थिक गुलामी का लंबा समय प्रांरभ होगा और देश कर्जदार हो जाएगा।

दूसरी ओर आजादी के बाद देश विभाजन में विस्थापित लोगों को पुन: बसाने में देश का बहुत धन और ऊर्जा खर्च हो चुकी थी। साथ ही देश के सामने और कई बड़ी चुनौतियां भी थीं। अत: नदियों को जोड़ने की योजना पर कार्य करना उस समय बेहद कठिन था।

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