दर-दर भटक रहे अफगानी

तालिबान ने उन सभी प्रमुख इंटरनेशनल बॉर्डर्स पर कब्जा कर लिया है, जिनसे होकर लोग पड़ोसी देशों में जा सकते हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि तालिबान केवल व्यापार के लिए जाने वालों या वैलिड डॉक्युमेंट के साथ बॉर्डर पर पहुंचने वालों को ही सीमा पार करने दे रहा है। जो लोग तालिबान का राज आने से डरे हुए हैं, उनके पास देश छोड़कर जाने के लिए इस तरह का पेपर वर्क नहीं है।

UN ने अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों को अपने बॉर्डर शरणार्थियों के लिए खोलने को कहा है, लेकिन अफगानिस्तान के पड़ोसी उज्बेकिस्तान ने अपनी सीमा को बंद करके सुरक्षा बढ़ा दी है। उसका इन सीमाओं को खोलने का कोई इरादा भी नहीं है। अफगानिस्तान से सबसे लंबी सीमा पाकिस्तान की लगती है। उसने भी अफगान रिफ्यूजियों को अपने देश में शरण देने से इनकार कर दिया है। हालांकि पाक-अफगान सीमा पर हजारों लोग जमा हैं, जो सीमा पार करके पाकिस्तान जाना चाहते हैं।

अफगानिस्तान की पश्चिमी सीमा ईरान से लगती है। ऐसी खबरें हैं कि हजारों अफगानी यहां भी सीमा पार करके ईरान जाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक इनमें से कितने सफल हुए हैं, इसका कोई आंकड़ा मौजूद नहीं है।

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