ऐसी भी मान्यता है कि यहां रोज अश्वत्थामा पूजा-अर्चना करने आते हैं

जामगेट के पास चोरल रिसोर्ट के नीचे से गुजरने वाले रास्ते की। जहां एक पहाड़ के करीब पांच सौ से ज्यादा फीट नीचे बाबा भोलेनाथ का पवित्र मंदिर है। इस मंदिर को खोदरेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। आसपास के गांव के लोग इसे छोटे अमरनाथ भी कहते हैं।

यह शिव मंदिर पहाड़ों की खो में स्वयंभू है। जिसमें इसे पूर्व में ही खोदरेश्वर महादेव का नाम दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां अश्वत्थामा भी आकर पूजा करते हैं, क्योंकि यहां छह बजे के बाद किसी का भी आना जाना सम्भव नहीं है। यहां 6 बजे के बाद पहाड़ियों के बीच में जुगनू चमकते हुए मनोरम दृश्य दिखाई देता है।

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